डॉ. महेन्द्र कुमार मिश्रा द्वारा लिखा गया यह लेख भाषा दर्शन और उसके शैक्षिक व्यवहार पर केंद्रित है। लेख में वैश्विक और भारतीय भाषा-विचारकों के संदर्भ से यह बताया गया है कि भाषा केवल संरचना नहीं, बल्कि अर्थ-निर्माण, सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक अभ्यास है।
यह लेख बहुभाषिकता, बच्चों के अनुभवों और कक्षा में संदर्भित भाषा-प्रयोग के महत्व को रेखांकित करता है तथा आधारभूत साक्षरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
Writer: डॉ. महेन्द्र कुमार मिश्रा
